ऑस्कर विजेता संगीतकार A.R. Rahman (ए.आर. रहमान) इन दिनों अपनी इंटरव्यू मे दिए हालिया बयानों को लेकर चर्चा में हैं। हाल ही में उन पर Communal Discrimination ‘सांप्रदायिक भेदभाव’ को बढ़ावा देने के आरोप लगे, जिसके बाद सोशल मीडिया पर एक बहस छिड़ गई। अब दिग्गज संगीतकार ने इन आरोपों पर अपनी चुप्पी तोड़ी है।
क्या है पूरा मामला?
पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया पर ए.आर. रहमान को लेकर कुछ पुराने वीडियो और बयान वायरल हो रहे थे, एक इंटरव्यू में संगीतकार ने कहा कि धीरे-धीरे वो संप्रदायिक भावना को फिल्मी दुनिया पर हावी होता हुआ महसूस कर रहे हैं। उनके इस बयान पर अब अन्य सेलेब्स के रिएक्शन सामने आ रहे हैं।जिनमें दावा किया जा रहा था कि वे काम के दौरान धर्म के आधार पर भेदभाव करते हैं। इन दावों ने तब तूल पकड़ा जब कुछ सोशल मीडिया यूजर्स ने उनके पुराने इंटरव्यूज को गलत तरीके से पेश किया।

रहमान ने सफाई में क्या कहा?
- बीबीसी एशियन को दिए एक इंटरव्यू में कम काम करने का कारण बताते हुए कहा- ‘बीते आठ साल से मैं यह महसूस कर रहा हूं कि इंडस्ट्री में टैलेंट के दम पर काम नहीं मिलता। म्यूजिक इंडस्ट्री की कमान ऐसे हाथों में हो गई जो न तो क्रिएटिव हैं और ना ही क्रिएटिविटी को समझते हैं। धर्म भी कम काम मिलने का करने का एक कारण है। आपके सामने तो लोग कुछ नहीं बोलते पर पीठ पीछे कानाफूसी करते हैं।’
- संगीतकार ने इसी इंटरव्यू में यह भी कहा कि धीरे-धीरे वो सांप्रदायिक भावना को फिल्मी और संगीत की दुनिया पर हावी होता हुआ महसूस कर रहे हैं। इसका असर उन्हें अपने काम पर भी पड़ता दिखाई दे रहा है।
- छावा’ फिल्म के बारे में रहमान ने कहा, ‘छावा एक बांटने वाली फिल्म है। मुझे लगता है कि इसने लोगों के बीच के बंटवारे का फायदा उठाया। लेकिन मुझे यह भी लगता है कि इसका मकसद बहादुरी दिखाना था।’
इनके बयान पर मिले कैसे रिएक्शन?
- “आपके जैसा नफरत फैलाने वाला इंसान नहीं देखा” : कंगना
- “मैंने मुंबई में ऐसा महसूस नहीं किया”: जावेद अख्तर
- “इंडस्ट्री मे साम्प्रदायिकता ऐसा कुछ भी नहीं”: शान
- “टैलेंट महत्त्व रखता है, धर्म नहीं” : शोभा डे
- “रहमान ने कहा तो सोचने वाली बात है”: वारिस पठान









